ठहरी सी जिन्दगी

जिन्दगी इस मोड पे आकर, कुछ ठहर सी गई है

गुजरते हुये, इन सहमे से पलो मे उलझ सी रही है



कल शाम को पूछा था जिन्दगी ने मुझसे

कभी कहीँ तो रुकोगे और करोगे हिसाब मुझसे

क्या वो ही हिसाब करने कि उम्मीद मे

मुझको खुद से ही रुसवा करने कि चाह मे

थाम के समय का आँचल, ठहर सी गई है जिन्दगी.

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