पल

वक्त की बदलती हवाओ ने

अक्सर ऐसे मोड पर ला कर छोडा है

जहाँ कुछ राहे आपस मे मिलती है

दिखती है अलग दिशाओ को जाती

पर सभी अतीत के, किसी धागो से जा कर मिलती है

हर एक राह ऐसी, जिसमे कुछ उलझे हुऐ पल

दम तोड रहे है, सिसकिँया ले कर

देखता रहता हूँ उन्हे खुली या बन्द आँखो से

चाह कर या न चाह कर भी

हर एक सिसकते पल से बाँधा तो खुद को मैने ही है

फिर सोचना से कितना बेमानी है, कि कोई आ कर मुझे…

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