Monthly Archives: February 2004

सुबह

हर शाम जिन्दगी, सोचती है उस सुबह के बारे मेँ

जो आज आयी थी, आयी थी और, सूरज की किरणो मे भर

कितनी आशाऐँ लायी थी

उजाला ऐसी शक्त्ति का, जो मेरे अरमानो को पहचान ने

और पूरा करने मे मेरे साथ रहती
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