Monthly Archives: November 2004

बूँद

एक बूँद, डगमगाती, पर रुकी हुई मेरी हथेली पर

जगमगाती, झिलमिलाती, व्याकुल सी फिसलने को

कभी तो एहसास दिलाती अपनी स्थिरता का

अगले ही पल बदलती है रुप अनिश्चितता का
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