Monthly Archives: December 2005

वास्तविक्ता

कभी वो चित्र आँखो के सामने फिर से प्रकट होता

वो चित्र जिसे कई बार मन की दीवारो पर अपनी आशाओ के

रंगो से बनाया था, कभी अकेले और कभी किसी के साथ मिल कर
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