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मेरी बिटिया

हर तरह के आंसुओ से,
मुद्दतो से पहचान थी
पर कैसे ख़ुशी से होती है आंखे नम,
वो तेरे आने के बाद जाना है

सूरज तो निकलता था पहले भी,
पर चांदी सी चमकती धूप
तेरे रुपहले चेहरे से भायी है

हर सवाल के पहले, अनेको बार … पापा पापा की खनक
कानो को कैसी भी लगे
आँखों में सदा एक नम ख़ुशी ही लायी है

वो तेरी छोटी सी मेकअप किट, चूडियां, वो टियारा
एल्सा, आना, रूपनज़ल की ड्रेसउप में इतराना
मन को भाता है बहुत

पर तेरी माँ के ऊंचे सैंडिल पहन ने की चाहते
जल्दी से बड़े होने की सारी ख्वाहिशे
उनसे तेरे पापा का मन कुछ घभराता है

फिर तेरी प्यारी सी मुस्कान
Papa don’t be sad
I will be always be with you forever का दिलासा
आँखों के किनारे, फिर एक नम सी ख़ुशी बन जाता है

रंग

रंग, जब एक कवि ने लिये
तो कर दिया प्रेमिका के रूप का वर्णन
गालो का रंग गुलाबी, और आँखे कथायी
कभी अधर थे लाल, और बिखरे से थे सुनहरी बाल

कुछ रंग एक चित्रकार ने लिये
और छिड़क दिया आकाश कुछ नीला सा
दिया एक रंग सूरज की आग को
एक रंग नदी के प्रवाह को

रंग जब आया एक माँ की जुबान पे
तो बेटे को मेरे “लाल” कहा था
और रंग
जो लगा एक गोपी के गाल पे
तो गुलाल बना था

फिर रंग मिले कुछ मौका-परस्तो को
और उनकी फितरत ही बदल दी
जो रंग बस घुलना जानते थे एक दूजे में
उन्हें नफरत भी आ गयी

हर रंग अब तेरा – मेरा हो गया ,
गावं-शहर, गली- महोल्ला
उत्तर-दखिन, ईश्वर-अल्ला,
सबका रंग पराया सा हो गया

अब ये सोचता हूँ कि
जब मिलेंगे न रंग एक दूजे से
तो कैसे कोई तस्वीर बनेगी
न होगा गर सम्मान हर रंग का
तो कैसे मेरे देश की तक़दीर बनेगी

सभी रंगो की किरणों से
मिल कर बनता है उजियारा
श्वेत शांति रंग है दुर्लभ,
यदि… एक रंग भी दुखियारा