सुबह

हर शाम जिन्दगी, सोचती है उस सुबह के बारे मेँ

जो आज आयी थी, आयी थी और, सूरज की किरणो मे भर

कितनी आशाऐँ लायी थी

उजाला ऐसी शक्त्ति का, जो मेरे अरमानो को पहचान ने

और पूरा करने मे मेरे साथ रहती
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तन्हा-तन्हा

तन्हा-तन्हा इस दुनिया मे मन ये मेरा घुमे

हर दिन, हर पल, हर मौसम मे, तुझको ही ये ढूँढे

किसी फूल की तुम खुशबू मे, मिल जाओगे शायद

बस इसी आस मे मन ये मेरा तन्हा-तन्हा घुमे
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भोर का भ्रम

एक भोर जब आँख खुली, एक स्वपन देख कर

हुआ अचम्भित, आस पास का द्रश्य देख कर

दिखी दूर उस भीगी घांस पर, धुन्ध की एक दीवार

मन ने सोचा झांक के देखूँ , क्या है उसके पार

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